परिचय
आज की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में Quality, Cost और Delivery सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। अगर प्रोडक्शन प्रोसेस कंट्रोल में नहीं है, तो डिफेक्ट, रीवर्क, स्क्रैप और कस्टमर कम्प्लेंट बढ़ जाते हैं।
इसी समस्या का वैज्ञानिक समाधान है SPC – Statistical Process Control।
SPC एक ऐसी तकनीक है, जिसमें डेटा और स्टैटिस्टिक्स की मदद से यह देखा जाता है कि कोई प्रोसेस Stable है या नहीं। आसान शब्दों में कहें तो,
👉 SPC हमें पहले ही बता देता है कि प्रोसेस बिगड़ने वाला है या नहीं।
SPC क्या है?
SPC (Statistical Process Control) एक डेटा-आधारित क्वालिटी कंट्रोल टूल है, जिसका उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि कोई प्रोसेस कंट्रोल में है या आउट ऑफ कंट्रोल।
SPC में:
प्रोसेस से डेटा लिया जाता है
डेटा को चार्ट पर प्लॉट किया जाता है
Upper Control Limit (UCL) और Lower Control Limit (LCL) तय की जाती है
Variations को एनालाइज किया जाता है
अगर प्रोसेस कंट्रोल लिमिट के अंदर है, तो प्रोसेस Stable माना जाता है।
SPC क्यों जरूरी है? (Why SPC is Important)
1. डिफेक्ट कम करने के लिए
SPC से हम डिफेक्ट बनने से पहले ही समस्या पकड़ लेते हैं। इससे स्क्रैप और रीवर्क बहुत कम हो जाता है।
2. कस्टमर सैटिस्फैक्शन बढ़ाने के लिए
जब पार्ट्स Consistent क्वालिटी के बनते हैं, तो Customer Complaint कम होती है।
3. Cost Reduction
कम स्क्रैप
कम रीवर्क
कम मशीन ब्रेकडाउन
इन सबका सीधा फायदा Cost Saving में होता है।
4. Process Improvement
SPC यह बताता है कि:
Variations कहां से आ रही हैं
मशीन, मैन, मेथड या मटीरियल में समस्या कहां ह
Variation क्या है? (SPC का आधार)
SPC पूरी तरह Variation पर आधारित है।
1. Common Cause Variation
नॉर्मल variation
प्रोसेस का हिस्सा
कंट्रोल में रहती है
उदाहरण: मशीन वाइब्रेशन, टेम्परेचर का हल्का बदलाव
2. Special Cause Variation
अचानक आने वाली समस्या
प्रोसेस को बिगाड़ देती है
उदाहरण:
Tool टूट जाना
गलत सेटिंग
गलत मटीरियल
👉 SPC का मुख्य उद्देश्य Special Cause Variation को पहचानना और खत्म करना है।
Control Chart क्या होता है?
Control Chart, SPC का सबसे महत्वपूर्ण टूल है।
इसमें 3 लाइन होती हैं:
Center Line (CL) – एवरेज वैल्यू
Upper Control Limit (UCL)
Lower Control Limit (LCL)
अगर डेटा:
UCL और LCL के अंदर है → Process OK
UCL या LCL के बाहर है → Process Out of Control
SPC के प्रकार (Types of Control Charts)
SPC चार्ट दो प्रकार के होते हैं:
1. Variable Control Charts
जब डेटा मेजरमेंट में हो (mm, kg, sec)
(a) X̄ – R Chart
Small sample size (2–5 parts)
Diameter, Thickness, Length जैसे डेटा
(b) X̄ – S Chart
Large sample size
Stable प्रोसेस के लिए
(c) I – MR Chart
Single observation
CNC, Grinding, Turning में बहुत उपयोगी
2. Attribute Control Charts
जब डेटा Count में हो (OK / Not OK)
(a) P-Chart
Defective percentage
Customer complaint analysis
(b) NP-Chart
Fixed sample size में defective count
(c) C-Chart
Defects per unit
(d) U-Chart
Variable sample size में defects
SPC कैसे लागू करें? (Step by Step)
Step 1: Critical Process पहचानें
CTQ (Critical To Quality)
Customer requirement से जुड़ा पैरामीटर
Step 2: Data Collection
Sampling plan बनाएं
Fixed time interval रखें
Step 3: Control Chart बनाएं
UCL, LCL कैलकुलेट करें
चार्ट पर डेटा प्लॉट करें
Step 4: Analyze करें
Out of control points
Trend, Shift, Pattern देखें
Step 5: Corrective Action
Root Cause Analysis
Permanent solution लागू करें
SPC के नियम (Western Electric Rules – सरल भाषा में)
कोई भी पॉइंट UCL/LCL के बाहर
7 पॉइंट एक ही साइड में
लगातार बढ़ता या घटता ट्रेंड
अचानक जंप
👉
SPC का उपयोग कहां होता है?
Automobile Industry
CNC Turning & Grinding
Heat Treatment
Assembly Line
Pharma & FMCG
Service Industry
Automobile Industry में SPC का उदाहरण
मान लीजिए:
Shaft diameter = 20 ± 0.02 mm
CNC मशीन पर SPC लागू किया
SPC से पता चला:
Tool wear के कारण धीरे-धीरे diameter बढ़ रहा है
👉 Tool को पहले ही change कर दिया गया
👉 Scrap बचा
👉 Customer rejection नहीं हुआ
SPC के फायदे (Advantages)
Process Stability
Consistent Quality
Scrap Reduction
Customer Trust
Data-based Decision
Management Confidence
SPC के नुकसान (Limitations)
Training जरूरी
Discipline चाहिए
गलत डेटा से गलत रिजल्ट
Small batch में मुश्किल
SPC और Six Sigma का संबंध
SPC, Six Sigma का Foundation है।
Six Sigma में DMAIC के Measure और Control Phase में SPC का उपयोग होता है।
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